प्रॉप फर्म चैलेंज क्या है?
आप एक फीस देकर इवैल्यूएशन अकाउंट खरीदते हैं। तय नियम तोड़े बिना प्रॉफिट टारगेट पूरा करने पर आपको फंडेड अकाउंट मिलता है, जिसके प्रॉफिट का बड़ा हिस्सा आपको मिलता है। नीचे दिए नियम ज़्यादातर फर्मों में मिलते-जुलते हैं, लेकिन हर फर्म अपने नियम खुद तय करती है।
| नियम | आम सेटिंग |
|---|---|
| प्रॉफिट टारगेट, फेज़ 1 | 8–10% |
| प्रॉफिट टारगेट, फेज़ 2 | लगभग 5% |
| डेली लॉस लिमिट | लगभग 5% |
| मैक्सिमम लॉस | लगभग 10% |
| फंडेड अकाउंट का लेवरेज | अक्सर चैलेंज से कम |
नियम 1: डेली लॉस कैसे गिना जाता है, यह पक्का जानें
कुछ फर्में दिन की शुरुआत के बैलेंस से गिनती करती हैं, कुछ बैलेंस या इक्विटी में जो ज़्यादा हो उससे। ज़्यादातर फर्में खुले ट्रेड का फ्लोटिंग लॉस भी जोड़ती हैं। यानी दिन में कोई ट्रेड 5% नीचे चला गया, तो बाद में प्रॉफिट में बंद होने पर भी अकाउंट जा सकता है।
नियम 2: रिस्क छोटा रखें
5% डेली लिमिट और 1% रिस्क पर आप एक दिन में 4 लॉस लेकर भी अगले दिन ट्रेड कर सकते हैं। 3% रिस्क पर सिर्फ 2 लॉस के बाद आप फेल होने से एक ट्रेड दूर होते हैं। 1% रिस्क और 1:2 रिस्क-रिवॉर्ड पर हर जीत लगभग 2% जोड़ती है, इसलिए 8% टारगेट के लिए लॉस से लगभग 4 ज़्यादा जीत काफी हैं।
नियम 3: 80% मार्जिन रूल न तोड़ें
कई फर्में खुले ट्रेड्स का मार्जिन अकाउंट के एक हिस्से तक सीमित रखती हैं, आमतौर पर 80%। इसे तोड़ने पर प्रॉफिट वाले अकाउंट का पेआउट भी रुक सकता है। यह सबसे ज़्यादा फंडेड स्टेज पर होता है, जहाँ लेवरेज कम (जैसे 1:10) हो जाता है।
उदाहरण: $5,000 अकाउंट, 1:10 लेवरेज, 80% लिमिट यानी $4,000 मार्जिन। गोल्ड 4,286 पर 1 लॉट को $42,862 मार्जिन चाहिए, इसलिए ज़्यादा से ज़्यादा 0.09 लॉट ही ले सकते हैं। हमारा प्रॉप फर्म लॉट साइज कैलकुलेटर मार्जिन रूल और आपका रिस्क, दोनों एक साथ जांचता है।
नियम 4: न्यूज़ रूल पढ़ें
कुछ फर्में NFP, CPI और FOMC जैसी बड़ी खबरों के कुछ मिनट पहले और बाद ट्रेडिंग पर रोक लगाती हैं, खासकर फंडेड अकाउंट पर। भारतीय समय में अमेरिकी डेटा आमतौर पर गर्मियों में शाम 6:00 बजे और सर्दियों में शाम 7:00 बजे आता है। इकोनॉमिक कैलेंडर रोज़ देखें।
नियम 5: जल्दबाज़ी न करें
कई फर्मों में अब चैलेंज की कोई समय सीमा नहीं है। आखिरी दिनों में लॉट डबल करने की कोई ज़रूरत नहीं। जो ट्रेडर पहले दिन और बीसवें दिन एक जैसा ट्रेड करते हैं, वही पास होते हैं।
नियम 6: कंसिस्टेंसी और स्टाइल के नियम देखें
कुछ फर्में कहती हैं कि कुल प्रॉफिट का तय हिस्से से ज़्यादा एक दिन से नहीं आना चाहिए। कुछ फर्में आर्बिट्राज, अकाउंट्स के बीच ट्रेड कॉपी करने या कुछ अकाउंट्स पर वीकेंड होल्ड की इजाज़त नहीं देतीं। ये नियम अक्सर पेआउट के समय पकड़े जाते हैं।
नियम 7: जर्नल रखें, स्ट्रैटेजी न बदलें
हर ट्रेड का कारण, साइज और नतीजा लिखें। जिस स्ट्रैटेजी से चैलेंज पास हुआ, फंडेड अकाउंट पर भी उसी रिस्क के साथ वही चलाएं।
चैलेंज खरीदने से पहले की चेकलिस्ट
- मार्जिन, न्यूज़ और कंसिस्टेंसी समेत सारे नियम पढ़ें।
- डेली लॉस कैसे गिना जाता है और दिन कब रीसेट होता है, यह जानें।
- चैलेंज और फंडेड अकाउंट के लेवरेज की तुलना करें।
- फर्म का पेआउट रिकॉर्ड और रिव्यू देखें।
- पहले ट्रेड से पहले कैलकुलेटर से लॉट साइज तय करें।