फॉरेक्स ट्रेडिंग क्या है?
फॉरेक्स (foreign exchange) दुनिया का सबसे बड़ा बाजार है, जहाँ एक करेंसी के बदले दूसरी करेंसी खरीदी-बेची जाती है। करेंसी हमेशा जोड़ी (पेयर) में ट्रेड होती है, जैसे EURUSD यानी 1 यूरो कितने डॉलर का है। अगर आपको लगता है कि यूरो मज़बूत होगा तो आप EURUSD खरीदते हैं, और भाव बढ़ने पर मुनाफा होता है। भाव में छोटे बदलाव को पिप में नापते हैं; पिप क्या है (अंग्रेज़ी में) इसे विस्तार से समझाता है।
असली सवाल यह है कि भारत में रहकर आप यह ट्रेडिंग कहाँ और कैसे कर सकते हैं। यहीं ज़्यादातर लोग गलती करते हैं।
छोटा जवाब
- Legal: NSE, BSE या MSE पर करेंसी फ्यूचर्स और ऑप्शंस, SEBI-रजिस्टर्ड ब्रोकर के जरिए। इसमें EURUSD, GBPUSD, USDJPY और USDINR जैसे पेयर शामिल हैं।
- शर्त के साथ legal: रुपये वाले पेयर (USDINR, EURINR, GBPINR, JPYINR) असली करेंसी एक्सपोजर को हेज करने के लिए हैं, सिर्फ सट्टे के लिए नहीं।
- Allowed नहीं: विदेशी ऑनलाइन ब्रोकर या ऐप पर फॉरेक्स या CFD ट्रेडिंग, और उसके लिए पैसे विदेश भेजना।
RBI असल में क्या कहता है
भारत में फॉरेक्स का कानून FEMA (Foreign Exchange Management Act, 1999) है और इसे RBI लागू करता है। RBI की 3 फरवरी 2022 की प्रेस रिलीज़ के अनुसार भारत के निवासी फॉरेक्स के सौदे सिर्फ authorised persons के साथ और permitted purposes के लिए कर सकते हैं। इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग सिर्फ RBI से authorised प्लेटफॉर्म या मान्यता प्राप्त एक्सचेंज (NSE, BSE और MSE) पर हो सकती है।
इसी रिलीज़ में साफ लिखा है कि विदेशी एक्सचेंज या विदेशी काउंटरपार्टी को मार्जिन के लिए पैसा भेजना Liberalised Remittance Scheme (LRS) के तहत allowed नहीं है। LRS में हर वित्त वर्ष (अप्रैल–मार्च) में 2,50,000 डॉलर तक विदेश भेज सकते हैं, पर सिर्फ allowed कामों के लिए, और ट्रेडिंग अकाउंट में मार्जिन डालना उनमें नहीं है।
RBI के शब्दों में, बिना authorisation वाले प्लेटफॉर्म से सौदा करने वाले निवासियों पर FEMA के तहत दंडात्मक कार्रवाई (penal action) हो सकती है। FEMA की धारा 13 में पेनल्टी शामिल रकम के तीन गुना तक हो सकती है।
RBI की Alert List
सितंबर 2022 से RBI एक Alert List जारी करता है, जिसमें वे नाम हैं जिन्हें भारत में फॉरेक्स डील करने या फॉरेक्स ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म चलाने की अनुमति नहीं है।
| तारीख | क्या हुआ | लिस्ट में नाम |
|---|---|---|
| 7 सितंबर 2022 | पहली लिस्ट | 34 |
| फरवरी 2023 | अपडेट | 48 |
| 7 जून 2023 | अपडेट | 56 |
| 24 नवंबर 2023 | अपडेट | 75 |
| 22 अक्टूबर 2024 | अपडेट | 88 |
| 19 नवंबर 2025 | सबसे नया अपडेट | 95 |
सबसे नई लिस्ट में Exness, OctaFX, XM, FBS, IC Markets, Pepperstone, Vantage, Tickmill, FXTM, AvaTrade, eToro, IG, FXCM, Forex.com और Alpari जैसे जाने-माने ब्रोकर, IQ Option, Olymp Trade, Binomo, Quotex और Pocket Option जैसे ऐप, और तीन जानी-मानी प्रॉप फर्म, FTMO, FundedNext और Smart Prop Trader, शामिल हैं। MetaTrader 4 और MetaTrader 5 के नाम भी लिस्ट में हैं।
- लिस्ट पूरी नहीं है। RBI खुद कहता है कि जो नाम लिस्ट में नहीं है, उसे authorised न समझें। किसी भी प्लेटफॉर्म, कोर्स या सिग्नल सर्विस को पैसे देने से पहले RBI की वेबसाइट पर ताज़ा लिस्ट देखें।
- प्रमोट करने वाले भी शामिल। लिस्ट में वे वेबसाइट और ऐप भी आते हैं जो ऐसे प्लेटफॉर्म का विज्ञापन करते हैं या ट्रेनिंग और सलाह देने का दावा करते हैं।
विदेशी ब्रोकर वाला रास्ता कहाँ बिगड़ता है
- पैसा ब्रोकर को नहीं, किसी व्यक्ति के खाते में जाता है। अप्रैल 2024 में RBI ने बैंकों से कहा कि ऐसे लोकल एजेंट पर नज़र रखें जो अलग-अलग ब्रांच में खाते खोलकर मार्जिन का पैसा इकट्ठा करते हैं, और उन्हें Enforcement Directorate (ED) को रिपोर्ट करें।
- OctaFX केस। अक्टूबर 2025 में ED ने बताया कि OctaFX की जांच में करीब ₹2,385 करोड़ की क्रिप्टोकरेंसी अटैच की गई, और कुल अटैच रकम ₹2,681 करोड़ से ज़्यादा हो गई। ED के अनुसार भारतीय ट्रेडर्स का पैसा UPI और लोकल बैंक ट्रांसफर से डमी खातों में लिया गया।
- खाता फ्रीज़, पैसा फंसा। एजेंट का खाता फ्रीज़ होने पर उसमें पड़ा पैसा फंस जाता है। कोई भारतीय रेगुलेटर या ओम्बड्समैन बिना authorisation वाले प्लेटफॉर्म से विवाद सुलझाकर पैसा वापस नहीं दिलाता, हालांकि आप RBI के Sachet पोर्टल (sachet.rbi.org.in) या cybercrime.gov.in पर शिकायत कर सकते हैं।
Legal तरीका: NSE पर करेंसी ट्रेडिंग
NSE, BSE और MSE पर करेंसी फ्यूचर्स और ऑप्शंस लिस्टेड हैं, पर ट्रेडिंग ज़्यादातर NSE पर होती है। Business Standard के अनुसार BSE पर जनवरी 2025 से करेंसी डेरिवेटिव्स में टर्नओवर ज़ीरो रहा है। किसी भी ऐसे SEBI-रजिस्टर्ड ब्रोकर के साथ, जो करेंसी सेगमेंट देता हो, सेगमेंट चालू करके ट्रेड कर सकते हैं।
| पेयर | 1 लॉट | 1 लॉट की वैल्यू | न्यूनतम मार्जिन (लगभग) | समय (IST) |
|---|---|---|---|---|
| USDINR | 1,000 डॉलर | लगभग ₹95,820 | लगभग ₹1,916 | सुबह 9:00 – शाम 5:00 |
| EURINR | 1,000 यूरो | लगभग ₹1,09,264 | लगभग ₹2,513 | सुबह 9:00 – शाम 5:00 |
| GBPINR | 1,000 पाउंड | लगभग ₹1,26,985 | लगभग ₹3,175 | सुबह 9:00 – शाम 5:00 |
| JPYINR | 1,00,000 येन (भाव 100 येन पर) | लगभग ₹60,803 | लगभग ₹1,824 | सुबह 9:00 – शाम 5:00 |
| EURUSD | 1,000 यूरो | लगभग ₹1,09,264 | लगभग ₹3,278 | सुबह 9:00 – शाम 7:30 |
| GBPUSD | 1,000 पाउंड | लगभग ₹1,26,985 | लगभग ₹3,810 | सुबह 9:00 – शाम 7:30 |
| USDJPY | 1,000 डॉलर | लगभग ₹95,820 | लगभग ₹2,875 | सुबह 9:00 – शाम 7:30 |
- लॉट छोटे हैं। NSE का 1 EURUSD लॉट 1,000 यूरो का है, यानी विदेशी ब्रोकर का 0.01 लॉट। 1 लॉट पर 50 पिप की चाल $5.00, यानी लगभग ₹479 है।
- सेटलमेंट रुपये में। EURUSD और USDJPY के कॉन्ट्रैक्ट का हिसाब भी रुपये में होता है।
- कॉन्ट्रैक्ट एक्सपायर होते हैं। रुपये वाले चारों पेयर (USDINR, EURINR, GBPINR, JPYINR) में हफ्ते वाले (शुक्रवार एक्सपायरी) और महीने वाले, दोनों कॉन्ट्रैक्ट हैं; EURUSD, GBPUSD और USDJPY में सिर्फ महीने वाले। महीने के कॉन्ट्रैक्ट महीने के आखिरी बिज़नेस डे से दो वर्किंग डे पहले दोपहर 12:30 बजे बंद होते हैं।
- तय समय। रुपये वाले पेयर सुबह 9 से शाम 5 बजे और बाकी पेयर सुबह 9 से शाम 7:30 बजे तक। फॉरेक्स मार्केट कब खुलता है पेज पर दुनिया के सेशन का समय देखें।
मार्जिन NSE Clearing तय करता है। ऊपर की टेबल में न्यूनतम मार्जिन मोटा अंदाज़ा है; ब्रोकर अक्सर इससे ज़्यादा मांगते हैं। 2% मार्जिन का मतलब भी कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू पर 50 गुना तक लेवरेज है, इसलिए लॉट साइज हमेशा स्टॉप लॉस से तय करें।
रुपये वाले पेयर हेजिंग के लिए, EURUSD पर शर्त नहीं
3 मई 2024 से RBI के नियम के अनुसार रुपये वाले करेंसी कॉन्ट्रैक्ट असली एक्सपोजर को हेज करने के लिए हैं। सभी रुपये वाले पेयर और सभी एक्सचेंज मिलाकर 100 मिलियन डॉलर तक की पोज़िशन के लिए कागज़ दिखाने की ज़रूरत नहीं, पर एक्सपोजर होना चाहिए और मांगने पर साबित करना होगा; ब्रोकर इसका डिक्लेरेशन लेते हैं। जिस नौकरीपेशा व्यक्ति की कोई विदेशी करेंसी आय या पेमेंट नहीं है, उसके लिए USDINR सट्टे का साधन नहीं है।
जिन कॉन्ट्रैक्ट में रुपया नहीं है, उन पर RBI ने मकसद की कोई शर्त नहीं रखी। इसलिए NSE पर EURUSD, GBPUSD और USDJPY ही बड़े पेयर ट्रेड करने का legal तरीका है। 2024 के बाद वॉल्यूम बहुत कम हुआ है, इसलिए ट्रेड से पहले ओपन इंटरेस्ट और बिड-आस्क स्प्रेड ज़रूर देखें।
गोल्ड का क्या?
विदेशी ब्रोकर पर XAUUSD एक CFD है, इसलिए उस पर भी वही नियम लागू हैं। भारत से गोल्ड ट्रेड करने के legal तरीके हैं MCX पर गोल्ड फ्यूचर्स और ऑप्शंस, NSE और BSE पर गोल्ड ETF, और फिज़िकल गोल्ड या गोल्ड फंड। गोल्ड लाइव चार्ट पेज बताता है कि MCX का भाव XAUUSD से अलग क्यों होता है।
प्रॉप फर्म और भारतीय ट्रेडर
प्रॉप फर्म ट्रेडिंग के लिए डिपॉज़िट नहीं लेतीं, बल्कि इवैल्युएशन अकाउंट बेचती हैं, और किसी भारतीय अथॉरिटी ने इन पर अलग से कुछ नहीं कहा है। लेकिन RBI ने FTMO, FundedNext और Smart Prop Trader को Alert List में डाला है। FundedNext ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि उसका नाम गलती से डाला गया क्योंकि भारत में उसका कोई काम नहीं है, पर लिस्ट नहीं बदली।
लिस्ट वाली फर्म को चैलेंज फीस देना legal है या नहीं, इसका कोई फैसला नहीं हुआ है। RBI की आम चेतावनी है कि बिना authorisation वाले सौदों के लिए पैसा न भेजें, इसलिए सावधानी यही है कि लिस्ट वाली फर्म को पैसे न दें। प्रॉप फर्म चैलेंज कैसे पास करें में नियमों की पूरी जानकारी है।
टैक्स कैसे लगता है
भारतीय एक्सचेंज पर करेंसी फ्यूचर्स और ऑप्शंस का मुनाफा आमतौर पर non-speculative बिज़नेस इनकम माना जाता है।
- ITR-3 भरें, क्योंकि यह बिज़नेस इनकम है।
- टैक्स आपके स्लैब रेट पर, ऊपर से 4% हेल्थ और एजुकेशन सेस (और कुल आय ₹50 लाख से ऊपर हो तो सरचार्ज)।
- लॉस 8 साल तक आगे ले जाकर सिर्फ बिज़नेस इनकम से घटा सकते हैं, पर तभी जब रिटर्न समय पर भरा हो। बिज़नेस लॉस को सैलरी से नहीं घटा सकते।
- टैक्स ऑडिट तब लगता है जब टर्नओवर ₹1 करोड़ से ऊपर हो, या ₹10 करोड़ से ऊपर, अगर नकद प्राप्तियाँ और नकद भुगतान दोनों कुल के 5% से ज़्यादा न हों। डेरिवेटिव में टर्नओवर का मतलब है हर सौदे के मुनाफे और नुकसान को, बिना माइनस के, प्लस मानकर जोड़ना; कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू नहीं। प्रिज़म्प्टिव स्कीम (44AD) पाँच साल के अंदर छोड़ने पर इससे कम टर्नओवर में भी ऑडिट लग सकता है, इसलिए CA से पूछें।
| कुल आय | टैक्स रेट |
|---|---|
| ₹4,00,000 तक | शून्य |
| ₹4,00,001 – ₹8,00,000 | 5% |
| ₹8,00,001 – ₹12,00,000 | 10% |
| ₹12,00,001 – ₹16,00,000 | 15% |
| ₹16,00,001 – ₹20,00,000 | 20% |
| ₹20,00,001 – ₹24,00,000 | 25% |
| ₹24,00,000 से ऊपर | 30% |
नई व्यवस्था में रिबेट से ₹12 लाख तक की आय पर टैक्स नहीं बनता, और करेंसी F&O की बिज़नेस इनकम पर भी यह रिबेट मिल सकता है।
- FY 2025-26: Finance Act 2026 ने बिना ऑडिट वाली बिज़नेस इनकम की ड्यू डेट 31 जुलाई से बढ़ाकर 31 अगस्त 2026 कर दी। ऑडिट वाले केस में CBDT ने रिटर्न की तारीख 21 नवंबर 2026 कर दी है। लेट रिटर्न 31 दिसंबर 2026 तक भर सकते हैं, पर उसमें बिज़नेस लॉस आगे नहीं ले जा सकते।
- 1 अप्रैल 2026 से नया Income-tax Act, 2025 लागू है। 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027 तक की आय "टैक्स ईयर 2026-27" में आती है, और सेक्शन नंबर बदल गए हैं, जैसे टैक्स ऑडिट का 44AB अब सेक्शन 63 है। टैक्स ईयर 2026-27 के स्लैब नहीं बदले।
- खर्च: करेंसी डेरिवेटिव पर STT नहीं लगता। ब्रोकरेज, एक्सचेंज ट्रांजैक्शन चार्ज और SEBI फीस (₹10 प्रति करोड़) लगती है, इन तीनों पर 18% GST, और खरीद पर 0.0001% स्टांप ड्यूटी।
- विदेशी प्लेटफॉर्म का मुनाफा भी टैक्सेबल है। विदेशी ब्रोकर या वॉलेट में रखा पैसा विदेशी संपत्ति है, जिसे ITR के Schedule FA में बताना ज़रूरी है। अपने CA से ज़रूर बात करें।
फॉरेक्स स्कैम के संकेत
- हर महीने तय रिटर्न का वादा। सितंबर 2025 में ED ने एक स्कीम के एजेंट को गिरफ्तार किया, जिससे ED के अनुसार करीब ₹391 करोड़ की अवैध कमाई हुई। स्कीम "रोबोट/AI-बॉट फॉरेक्स ट्रेडिंग" से हर महीने 5-6% रिटर्न का वादा करती थी, जबकि ED के मुताबिक असल में कोई फॉरेक्स ट्रेडिंग हुई ही नहीं। असली ट्रेडिंग में तय रिटर्न नहीं होता।
- किसी व्यक्ति के खाते में पेमेंट। UPI या बैंक ट्रांसफर से ऐसे नाम पर पैसा भेजने को कहा जाए जिसका ब्रोकर से कोई लेना-देना नहीं।
- सोशल मीडिया का दबाव। RBI की चेतावनी में सोशल मीडिया, सर्च इंजन, OTT और गेमिंग ऐप के विज्ञापनों और सीधे संपर्क करने वाले एजेंटों का ज़िक्र है।
- दोस्तों को जोड़ने पर कमीशन। कई ऐसी स्कीमें इसी तरह फैलती हैं।
- "RBI approved" या "SEBI registered" का दावा बिना नंबर के। SEBI की वेबसाइट पर किसी भी रजिस्टर्ड ब्रोकर को नाम या रजिस्ट्रेशन नंबर से चेक कर सकते हैं।
Legal तरीके से शुरुआत कैसे करें
- किसी SEBI-रजिस्टर्ड ब्रोकर के साथ अकाउंट खोलें जो करेंसी डेरिवेटिव देता हो, या अपने ब्रोकर से करेंसी सेगमेंट चालू करवाएं।
- अगर हेज करने के लिए कोई करेंसी एक्सपोजर नहीं है, तो EURUSD, GBPUSD और USDJPY वाले कॉन्ट्रैक्ट चुनें।
- पहले ऑर्डर से पहले लॉट साइज, एक्सपायरी, ओपन इंटरेस्ट और स्प्रेड देखें।
- हर ट्रेड का साइज स्टॉप लॉस और तय रिस्क से निकालें। NSE का 1 EURUSD लॉट 0.01 स्टैंडर्ड लॉट के बराबर है, इसलिए कैलकुलेटर में 0.03 लॉट का मतलब NSE के 3 लॉट। लॉट साइज कैसे निकालें देखें।
- हर ट्रेड और खर्च का रिकॉर्ड रखें, ITR-3 में काम आएगा।
यह गाइड आम जानकारी है, कानूनी या टैक्स सलाह नहीं। नियम 1 अक्टूबर 2026 को RBI, NSE और आयकर विभाग के स्रोतों से जांचे गए। पूरी जानकारी अंग्रेज़ी में: Forex trading in India।